दिल से दिल तक शायर की अवाज़

   उसके चेहरे पे इस क़दर नूर है। ... 
    की उसके लिए रोना भी मंजूर है.... 
    यार बेवफा भी  नहीं कह सकता उसको
    यार बेवफा भी  नहीं कह सकता उसको
    प्यार तो मैंने ही किया था उससे 
    वो तो बिलकुल ही बेकशूर है। ... 

  उस एक मुलाकात के बाद चैन से जी भी ना पाया 
    अरे हुश्न पे मरने वालो मैंने तो दिल है लगाया 
    कैसे छोड़ दू उसे !!!अरे तुम्ही बताओ कैसे छोड़ दू उसे 
    जिसके यादों में रात रात भर आंशू है बहाया।।।।।।।।

   मैंने दिल लगा कर की  ज़िन्दगी की गलती बहोत बड़ी  
     मैंने दिल लगा कर की  ज़िन्दगी की गलती बहोत बड़ी
     पछतावा तो बहोत है  !! पछतावा तो बहोत है मगर 
     अब कोई  फायदा नहीं क्योकि आगे मेरे बर्बादी है  खड़ी  

   प्यार का ज़िक्र करना हमें आता भी नहीं था  
     प्यार का ज़िक्र करना हमें आता भी नहीं था 
     और करते भी तो कैसे ऐ हुश्न की मल्लिका 
      तुमको मेरा प्यार सूझता भी नहीं 

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